Thursday, August 28, 2008

जीवन की पीड़ाओं से ...

जीवन की पीड़ाओं से यह मन व्याकुल जब हो जाता है
तब सावन नयनों में भरकर गीत अधर पर जन्माता है

सूरज का बस तपन झेलता
सदा पिपासित मरुथल रहकर
सागर को जल दे जाती हैं
दूर दूर से सरिता बहकर
ऐसा विषम विधान देखकर मन आकुल जब हो जाता है
तब सावन नयनों में भरकर गीत अधर पर जन्माता है

दर दर भटके उमर बेचारी
केवल एक किरण को पाने
चिंतन जनम जनम भर तरसे
दर्शन का वह रूप ना जाने
ऐसा मन का एक " मनोरथ " अभिशापित जब हो जाता है॥
तब सावन नयनों में भरकर गीत अधर पर जन्माता है

काँटों के बीच पुष्प पनपते
यह सबने स्वीकार लिया है
इसलिए सुख कि आशा में
दुःख को अंगीकार किया है
लेकिन जग का सुख सारा जब कैद महल में हो जाता है
तब सावन नयनों में भरकर गीत अधर पर जन्माता है

जीवन के कोई विषम क्षणों में
अपनों ने मुख मोड़ लिया हो
सारे पावन रिश्ते नाते
क्षण में केवल तोड़ दिया हो
तब एकाकीपन से बोझिल मन कुछ पल जब हो जाता है
तब सावन नयनों में भरकर गीत अधर पर जन्माता है

रचयिता
सुकवि बुधराम यादव , वर्ष - १९८०
बिलासपुर

Sunday, August 24, 2008

मोर कुंवर कन्हैया...!


जन्माष्टमी के पावन बेरा मा...परसतुत हे॥




मोर कुंवर कन्हैया...!


मोर कुंवर कन्हैया बलदाऊ के भइया
तैं झन जाबे माखन चोराय
बदनाम होथे भइया तैं झन जाबे माखन चोराय !


नौ लाख गइया उबरय नन्द महर घर
लाखन हें बछुरा बंधे !
दूध अउ दही के गा नंदिया बोहाथे
माखन सकले नई सकलाय !!
अतको मा का घट गय तोरबर कन्हैया
ओरहन जौन लाथस बलाय !
बदनाम होथे भइया तैं झन जाबे माखन चोराय !

मन लागय जतका माखन मिसरी लल्ला
घर में गुवालन संग खाव !
पन खोंची भर खातिर औरे घर जाके
चोरहा ये नाव झन धराव !!
घेरी बेरी बरजेंव नई मानस कन्हैया
दिन दिन तैं जाथस नथाय !
बदनाम होथे भइया तैं झन जाबे माखन चोराय !


खाये पीये के बस ओढर बनाथस
मसर मोटी करथस तैं जाय !
दैहा दूधहा के सब राहित छडा थस
सिकहर ले देथस गिराय !!
चिखला मतांवय तोर संगवारी चेलिक
अउ नाव तोर देंथय टिपाय !
बदनाम होथे भइया तैं झन जाबे माखन चोराय !


काय तोर नाठाइन ओ गरीब सब गुवालिन
जाथस बदला जेकरा भंजाय !
काय डार दिहिन उन माखन मा मोहनी
जौन गये तैं निचट मोहाय !!
कान धर कान्हा किरिया खा अब 'बुध' कहे
मान तोला जसुदा समझाय !
बदनाम होथे भइया तैं झन जाबे माखन चोराय !


रचयिता
सुकवि बुधराम यादव
बिलासपुर

अपन गोठ...

सुकवि बुधराम यादव जी के रचित थोरकुन गीत, कविता, जागरण गीत , मुक्तक , साखी के गुरतुर-गोठ अउ मनोरथ के माध्यम से आप मन अवलोकन करेव । ये सब मोर तीर जौन आदरणीय के जुनाहा संग्रह रहिस ओखरे खजाना आए. ...उनकर गीत/रचना प्रसतुत करईया तो मे हवव , पर आपोमन ला ऐसे लगत होही के उनकर रचना बर आपमन के जौन प्रतिक्रिया बिचार मिलथे ,तेखर बर आदरणीय बुधराम जी के का सोचना हवे..... ता मे उन्करे खजाना -संग्रह म ले एक उनकर लेख इन्हा पोस्ट करत हंव ....... आर्शीवाद देहव

अपन गोठ...

मिरगा कस बिरथा तिसना पाले जनव उचाट मारत जिनगी हा तीसर पहर म कब हबर गय पता नई लगिस , पीछू डहर झाँके ले बहुत पहाये अउ थोरे बचाए के मरम हा सालथे , जीव ला कचोतथे अउ सुरता आथे नीत के ओ गोठ जौन माता-पिता , गुरुजन अऊ बड़का सियान मन ले सुने रहेन अऊ जेकर परभाव हा आज घलव संकलप के रूप म हावय के .......

सेवा म अरपन कर सगरी -अपन हित बिसराके
करज चुका ले महतारी के मनुख तन ये पाके

सोरह आना सच आय के ----- आये हें सो जाये बर राजा रंक फ़कीर जमो निचट जुच्छा हाथ , जत्तेक इंहा पाये , कमाए हें इहें गवाएं परही।
" अंचरा के मया " जनम देवैया महतारी अउ कोरा म basar देवैया धरती महतारी दुनो के मया के बखान अउ महिमा गान करे के laaikaai जतन आय , जौन हां ये माटी के दुलौरा जमो मनखे तक कुछ आखर मा पहुचाये ले बिस्वास हे जरुर सनेह अउ दुलार के भागी बनही ।
ये गीत अऊ कविता मन ला एक संग्रह के सकल देवाय म मोर हित-मिट साहित्यकार मन के संगी धुरंधर साहित्यकार अउ प्रयास प्रकाशन के निदेशक डॉक्टर विनय पाठक के गजब आभारी हँव ।
परम आदरणीय पंडित राजेंद्र प्रसाद शुक्ला , डॉक्टर पालेश्वर प्रसाद शर्मा जइसन प्रतिष्ठित अउ वरिष्ठ मनीषी मन के दू आखर आसिरवचन अउ सनेह के खातिर बहुते आभारी हंव ।
भाई कृष्ण कुमार भट्ट 'पथिक ' , डॉक्टर अजीज रफीक अउ सनत तिवारी घलव ला धन्यवाद ।
गीत - कविता के ये संग्रह मोर पूजनीया महतारी अउ पिता ला परम श्रद्धा सहित समर्पित हवय। जिनकर असीरवाद के आन्छत अपन भाखा के सेवा मा ये अरपन होए पावत हे ।
1966-६७ ले प्रयास प्रकाशन ले जुरे साहत्या यात्रा म , बिसरत , भुलावत , रेंगत , सुस्तावत बरस २००१ मा बिलासा कला मंच के छैन्हा मा घाम घाले बर पहली ठीहा पाईस ।
आख़िर मा ये माटी के जमो गुनिजन , मुनिजन , सुधिजन , गुरुजन अउ बुधजन मन ले निवेदन हवय के येला पढ़के , सुन के , देख के एकर बने अउ घिनहा ला पोगरी झन पचोंहय। अपन सनेह संग सुघर सुझाव अउ आसिरवाद ला बिना अबेर करे मोर कटी भेजे बर झन भुलाहन्य ।

तुंहर सनेह अऊ दुलार के अगोरा मा........


pataa...
बुधराम यादव
एम.आई.जी.अ/८
चंदेला नगर
ringroad no.२
बिलासपुर छत्तीसगढ़