Sunday, October 26, 2008

गीत तुम्हारे लिए मैं गा रहा हूँ ...

गीत तुम्हारे लिए मैं गा रहा हूँ
तुम सुनो या न सुनो मेरे साथी
मन की व्यथाएं तुम्हें सुना रहा हूँ

भावना की झोली में संजोयी हुई
उम्र भर की सारी उपलब्धियां
वेदनाएं शब्दों में ढलती हुई
पा रही हैं मुखर अभिव्यक्तियाँ
यूँ ठगे से क्यूँ खड़े हो राह में .....
चाहो तो बटोर लो लुटा रहा हूँ
गीत तुम्हारे लिए..........

चुरा गई उम्र का प्रभात कोई
शाम की सुनहरी सी लालिमा
यौवन की दहकती दोपहरी को
घेर रही निष्ठुर सी कालिमा
निशा का स्वरूप सच नहीं मालूम ......
घोर तिमिर को गले लगा रहा हूँ
गीत तुम्हारे लिए..........

कभी लगे गंभीर समुन्दर हूँ
ज्वार कामनाओं की चलती है
और कभी वह स्थिर तट बेबस
लहरें आकर जहाँ मचलती हैं
कब तक संवेदनाओं को पालूं ....
आहत हर पल होते जा रहा हूँ
गीत तुम्हारे लिए..........

कब तलक यूँ ही दर-बदर
अर्थहीन संज्ञा को पूजते
अपनी विवशता बयां करूँ साथी
हार रहा हूँ ख़ुद से जूझते
डर है मुझे तुम कहीं न खो जाओ ....
इसलिए अपना पता बता रहा हूँ
गीत तुम्हारे लिए..........

रचयिता .....
सुकवि बुधराम यादव

13 comments:

अनूप शुक्ल said...

सुन्दर प्रस्तुति!

संजीव तिवारी said...

वेदनांए शव्‍दों में ढलती हुई, पा रही हैं मुखर अभिव्‍यक्तियां ।


मेरे मन व हृदय को सिंचित करती इस कविता को प्रस्‍तुत करने के लिए बहुत बहुत आभार ।

आदरणीय सुकवि को प्रणाम एवं आपको दीपावली की हार्दिक शुभकमानांयें

मीत said...

सुंदर प्रस्तुति. शुक्रिया.

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुन्दर,अति सुन्दर भाव,
धन्यवाद
दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें

दीपक said...

सुंदर उद्गगार !!आभार

दीपावली की हार्दिक बधाई !! ज्योति का यह पर्व आपके जीवन से निराशा का तम नष्ट करके आपको आशा उत्साह शांती प्रगती रुपी ज्योति प्रदान करे ॥

Udan Tashtari said...

हर बार की तरह बुधराम जी को पढ़कर आनन्द आया. आभार आपका.

आपको एवं आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

संजू बाबा said...

maza aa gaya sach mein.
cheers

Gyan Dutt Pandey said...

सुन्दर और सुन्दर प्रस्तुति!

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा said...

सुकवि बुधराम जी की सुंदर कविता प्रस्तुत करने के धन्यवाद. दीवाली पर्व की हार्दिक मंगल शुभकामना .

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

आपको दीपावली की हार्दिक शुभकमानांयें

सुंदर प्रस्तुति!!आभार

dr. ashok priyaranjan said...

अच्छा िलखा है आपने । दीपावली की शुभकामनाएं । दीपावली का पवॆ आपके जीवन में सुख समृिद्ध लाए । दीपक के प्रकाश की भांित जीवन में खुिशयों का आलोक फैले, यही मंगलकामना है । दीपावली पर मैने एक किवता िलखी है । समय हो तो उसे पढें और प्रितिक्रया भी दें-

http://www.ashokvichar.blogspot.com

अभिषेक ओझा said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति !

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुंदर रचना !
आपको परिवार व इष्ट मित्रो सहित दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं !