Friday, November 7, 2008

नेताजी का मोबाइल - 2

नेताजी सुबह से अपने एयरकन्डीशन कार से चुनाव क्षेत्र के दौरे पर हैं....अब कहाँ चलना है..? भैयाजी, अयोध्या नगर..! अच्छा...गाड़ी पहले ही रोक लेना. भैया जी, वैसे भी गाड़ी अन्दर तो जायेगी नहीं.... रोड ही कहाँ है...!!! अबे, चुप्प्प....! बीच में ही किसी ने टोका. पैदल हाथ जोड़कर चल रहे नेताजी जहाँ उम्र में बड़े....किसी को देखते स्मरण पर जोर आजमाकर नाम बोलते.....उसका चरण स्पर्श कर लेते. अचानक बाएँ मुडे...... सिर झुकाया...... और सदाराम महावर के झुग्गी में घुसकर अन्दर पड़ी टूटी मचिया पर जैसे तैसे लेटी बुधिया के सिरहाने ठिठक कर लौटे और पैर तरफ़ जगह बनाकर जम गये. ....माताराम कैसी हो..!  सदाराम.... [ एक सेवक बीच में इशारा करता है..]  फ़िर अधखुले मुँह से...... बजता हुआ मोबाइल नेताजी को पकड़ा देता है..... आवाज आती है..." - कहाँ हो भैयाजी..!  यहाँ घर में माँ को दिल का दौरा पड़ गया है.... जल्दी घर आ जाइए."  मुँह में दबाये पान को दायें गाल से बांयी ओर कर अविचलित भाव से मोबाइल को.....कान से हटाकर मुँह पर लाकर सबको सुनाते हुए नेताजी कहते हैं........ अरे, इतना भी मेनेज नहीं कर सकते......... मैं अपनी माँ के पास ही तो हूँ...... और ... सदाराम ... माताराम की तबियत ठीक तो रहती हैं न....!!!

.....समीर यादव

16 comments:

Udan Tashtari said...

क्या कहें इनका!! आपने सही चित्र उकेर दिया है.

योगेन्द्र मौदगिल said...

kora sach hai janaab

Anil Pusadkar said...

लगा तीर निशाने पर्।नेतागिरी का सही और सटीक इन्वेस्टिगेशन।

Gyan Dutt Pandey said...

नेता की नौकरी (पढ़ें नौटन्की) हर एक के बस की नहीं है।

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

बहुत खूब! हालाँकि ऐसा पढ़ा है पहले.. याद नही आ रहा.. शायद दैनिक भास्कर के रसरंग में.. क्या वहा आपने ही लिखा था?

seema gupta said...

........ अरे, इतना भी मेनेज नहीं कर सकते......... मैं अपनी माँ के पास ही तो हूँ...... और ... सदाराम ... माताराम की तबियत ठीक तो रहती हैं न....!!!
" ha ha ha but hadd hai nauntankee kee bhee... good to read"

Regards

समीर यादव said...

@ कुश जी....
.....सूक्ष्म स्मरण के लिए शुक्रिया.

अभिषेक ओझा said...

बहुते बढ़िया !

Animesh said...

janab aap neta logo ko bahut kareeb se jaante hai kya aap bhi koi neta to nahi.....ha ha ha....

समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...

बहुत ही सटीक . धन्यवाद.

डॉ .अनुराग said...

झकास लेख है भाई....एक दम झकास !

pallavi trivedi said...

kya baat hai sameer...aajkal railiyon mein ghoom rahe ho kya? sahi picture kheenche ho.

राज भाटिय़ा said...

अरे अपने मुन्ना भाई(राहुल) भी तो यही कर रहै है, भाई मजवुरी है , यह सब नोटंकी ना करे तो वोट कोन देगा???
आप ने बहुत ही सुंदर व्यंग किया है, धन्यवाद

दीपक said...

मै भी यही सोच रहा हुँ !!नैनो तो टाटा जी बना देंगे रोड कौन बनायेगा ?

बवाल said...

achha hai jee achha hai, chhote kaptaan saheb.

VernettaSabryna said...

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