Sunday, August 17, 2008

जिंदगी के सबब खो रहे हैं



लोग क्या से क्या हो रहे हैं
जिंदगी के सबब खो रहे हैं


रातों रात ये धन बल जुटाने
लूट रहे दिन-दहाड़े खजाने
भूलकर क्या है नेकी बदी क्या
हैं लगे दांव पर सब लगाने
बेअदब ये गजब हो रहे हैं
जिंदगी के सबब खो रहे हैं



खुद से खुद में सिमटने लगे हैं
राह असली भटकने लगे हैं
मन से इतने हुए कैसे दुर्बल
अपनों को ही खटकने लगे हैं
नासमझ बिन जतन रो रहें हैं
जिंदगी के सबब खो रहे हैं



घात प्रतिघात करने लगे हैं
त्रास संत्रास भरने लगे हैं
कौन किस पर करे अब भरोसा
अपने अपनों से मरने लगे हैं
खून से खून को धो रहे हैं
जिंदगी के सबब खो रहे हैं



घर से बेघर हुए जा रहे हैं
जुर्म के बिन सजा पा रहें हैं
सैकडों को ये दरिन्दे हर दिन
मौत के मुंह में पहुंचा रहे है
संतरी नींद में सो रहे हैं
जिंदगी के सबब खो रहे हैं



बेरहम दुश्मनों की जमातें
चैन दे दिन नाही रातें
सार्थक कुछ समाधानों के बिन
बढ़ते ही जा रही वारदातें
धरती भर ये कहर बो रहे हैं
जिंदगी के सबब खो रहे हैं



आये जिसके लिए भूल बैठे
थोड़े पाकर बहुत फूल बैठे
छोड़ गोता लगाना जलधि में
लहरों से खेलने तूल बैठे
खुद से खुद बेखबर हो रहे है
लोग क्या से क्या हो रहे हैं
जिंदगी के सबब खो रहे हैं

 
रचियता.....
सुकवि बुधराम यादव
बिलासपुर
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....................... परिचय...............
......................बुधराम यादव ............
पिता का नाम - श्री भोंदू राम यादव
पत्नी - श्रीमती कमला देवी यादव
जन्मतिथि - 3 मई 1946
पता - ग्राम खैरवार (खुर्द) तहसील-लोरमी, जिला-बिलासपुर, छत्तीसगढ़.
शैक्षणिक योग्यता - सिविल इंजीनियरिंग में पत्रोपाधि अभियंता
साहित्यिक अभिरुचि - गीत एवम कविता लेखन छत्‍तीसगढी एवम हिंदी में, सतसाहित्य अध्ययन चिंतन और गायन
कृतियाँ - काव्य संग्रह " अंचरा के मया " छत्‍तीसगढी गीत एवम कविता संग्रह प्रकाशित
प्रकाशन एवम प्रसारण - वर्ष 1966-67 से प्रयास प्रकाशन बिलासपुर से प्रकाशित काव्य संग्रह 'खौलता खून', मैं भारत हूँ, नए गीत थिरकते बोल, सुघ्घर गीत एवम भोजली आदि में रचनाएँ प्रकाशित हुई . इनके अतिरिक्त अन्य आंचलिक पत्र पत्रिकाओ एवम काव्य संग्रहों में भी रचनाओं का प्रकाशन होता रहा है. आकाशवाणी तथा गोष्ठी एवम कवि सम्मेलनों के माध्यम से भी निरंतर साहित्य साधना करते रहें हैं.
सम्प्रति - अभियंता के पद पर विभिन्न स्थानों में शासकीय सेवा करते हुए साहित्य साधना में सक्रिय रहे, वर्तमान में पद से सेवानिवृत होकर बिलासपुर में सक्रिय.
वर्तमान पता - एम.आई.जी. ए/8 चंदेला नगर रिंग रोड क्र. २ बिलासपुर, छत्तीसगढ़

6 comments:

Anwar Qureshi said...

एक अच्छी पोस्ट के लिए शुक्रिया ...

Anil Pusadkar said...

Sameer jee Budhram ji ko aapke blog par dusari bar padh raha hun.badhai aapko aur budhram jee ko

Nitish Raj said...

बहुत ही बढ़िया लेकिन ये फोटो तो बेड़ा घाट की है, है ना। बताइएगा जरूर।

छत्तीसगढिया .. Sanjeeva Tiwari said...

आये जिसके लिए भूल बैठे
थोड़े पाकर बहुत फूल बैठे
छोड़ गोता लगाना जलधि में
लहरों से खेलने तूल बैठे .............


आदरणीय बुधराम जी को इस मौन प्रेरणा के गीत के लिये धन्‍यवाद एवं आपको इसे यहां प्रस्‍तुत करने के लिए आभार ।

pallavi trivedi said...

bahut sundar rachna hai....

दीपक said...

कितनी सच्ची बात बिल्कुल साफ़ भाषा मे !! आभार आपका