Monday, August 11, 2008

तैं भौंरा बन के आजा

सुध के बाती म तोर जोही जिनगी के जोत जगावत हौं !
तैं भौंरा बन के आजा गियाँ तन बगियाँ मैं ये सजावट हौं !!

लुगरा पहिरेंव रेसमाही
गहना ला जमो गवानाही
अंगरा चुहय ये अंग-अंग ले
बैरी देखत म जरजाही !!
एक जुग मा बगरे केस कोर मै सेंदुर आज लगावत हौं !
तैं भौंरा बन के आजा गियाँ...

खुंट धर अंगना लीप डारेंव
मोतियन चौंक ये पुर डारेंव !
गंगाजल मा नहवा के
कंचन काया कर डारेंव !!
अरजी-बिनती कर बेलपाती शिवजी म ये दे चढ़ावत हौं !
तैं भौंरा बन के आजा गियाँ....

खोर गली ये सुघर बहारे
दियना घी के घलव बारे !
डेहरी बईठे बाट जोहय
दुनो ये नयना रतनारे !!
समुन्हें ले जमो जवईया सो धनी रहि-रहि के सोरियावत हौं !!
तैं भौंरा बन के आजा गियाँ...

घेरी बेरी ये अंचरा सरकय
फर फर डेरी अंग फ़रकय !
अलबेला तोर औती के
सुख मा आठों अंग भर गयं !!
छिन घर अंगना छिन खोर गली तोर आरों ओरखे जावत हौं !
तैं भौंरा बन के आजा गियाँ ....

पापी कौआं छानी मा बोलय
जनव भेद जिया के खोलय !
तोर केरा खाम कस बइयां बिन
मन पीपर पात कस डोलय !!
सइयां पाँव पखारे बर दूब चन्दन घलव मंगावत हौं !

तैं भौंरा बन के आजा गियाँ तन बगिया मै ये सजावत हौं..
सुध के बाती मा तोर जोही जिनगी के जोत जगावत हौं...

............रचनाकार
.... सुकवि बुधराम यादव
..... बिलासपुर

1 comment:

GIRISH BILLORE MUKUL said...

पापी कौआं छानी मा बोलय
जनव भेद जिया के खोलय !
तोर केरा खाम कस बइयां बिन
मन पीपर पात कस डोलय !!
सइयां पाँव पखारे बर दूब चन्दन घलव मंगावत हौं !
sach adbhut सुकवि बुधराम यादव ko saadar pranam sampreshit keejie
geet lay-tal se poora anushashit,saath hee bhav ADBHUT